अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च॥ (Non-violence is the highest or ultimate duty/virtue)
अहिंसा ही सर्वोच्च या परम है; ठीक वैसे ही, धर्म (न्याय/सही आचरण) की सेवा या रक्षा के लिए की गई हिंसा भी वैसी ही है। (So too is violence done in the service or protection of Dharma (righteousness).)
भगवान की अदालत
आप अकेले नहीं हैं भगवान कृष्ण आपके साथ हैं — सत्य और न्याय की रक्षा हि हमारा संकल्प है
गरुड़ पुराण के अनुसार नरक और दंड विधान | निःशुल्क न्याय एवं सुरक्षा अभियान
परिचय: गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के उपरांत प्रत्येक आत्मा को यमराज की अदालत में अपने कर्मों का लेखा-जोखा देना पड़ता है। सांसारिक जीवन में किए गए छल, अधर्म, शोषण और पापों के आधार पर विभिन्न नरकों में कठोर व अटल दंड का विधान है।
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Krishan Kshatriya is the President of Satyug Sena and Vishnu Sena. He holds an MBA and has pursued CA Final, along with a background in Software Engineering. He is also a Reiki Grand Master, Gym Coach, Black Belt, Boxer, Wrestler, Digital Marketer, Graphic Designer, Astrologer, Actor, and Cinematographer, with knowledge of the Vedas and Divya Astra.
गरुड़ पुराण के अनुसार प्रमुख पाप एवं दंड की तालिका
| क्र. | पाप / दुष्कर्म | निर्धारित दंड |
|---|---|---|
| 1 | तामिस्र (Tamisra) — दूसरों का धन, संपत्ति, जमीन या अधिकार हड़पना। | अंधकारमय कूप में यमदूतों द्वारा कठोर प्रताड़ना व यातना। |
| 2 | अंधतामिस्र (Andhatamisra) — विश्वासघात, फरेब करना और अपनों को धोखा देना। | गहरे अंधकार में बांधकर तीव्र शारीरिक कष्ट दिए जाते हैं। |
| 3 | रौरव (Raurava) — बेकसूर जीवों को सताना एवं झूठी गवाही देना। | विषैले रूरू जीवों द्वारा काटा जाना एवं कोल्हू में ईख की भांति पेरा जाना। |
| 4 | महारौरव (Maharaurava) — स्वार्थ के लिए दूसरों के घर, खेत जलाना व भारी विनाश करना। | धधकती आग व अंगारों के बीच लगातार तपाया और पकाया जाना। |
| 5 | कुम्भीपाक (Kumbhipaka) — निर्दोष मूक पशुओं की क्रूर हत्या एवं गरीबों की भूमि छीनना। | खौलते तेल और धधकती रेत के विशाल बर्तनों में उबाला जाना। |
| 6 | कालसूत्र (Kalasutra) — माता-पिता, बुजुर्गों, गुरुओं व संतों का अपमान व तिरस्कार। | अत्यंत तप्त तांबे की लाल-गर्म भूमि पर तड़पाया जाना। |
| 7 | असिपत्रवन (Asipatravana) — धर्म मार्ग छोड़कर अधर्म फैलाना और लोगों को भटकाना। | तलवार जैसी तीखी धार वाले पत्तों के वन में अंगों का कटना। |
| 8 | सूकरमुख (Sukaramukha) — सत्ता या अधिकार के घमंड में बेकसूरों को सजा देना। | यंत्रों द्वारा शरीर की हड्डियों को बार-बार कुचला जाना। |
| 9 | अंधकूप (Andhakupa) — कमजोर व असहाय जीवों को बिना कारण पीड़ा पहुंचाना। | विषैले कीड़ों व बिच्छुओं से भरे अंधे कुएं में गिराना। |
| 10 | कृमिभोजन (Krimibhojana) — अकेले भोजन करना, लालच व भूखों के साथ अन्न न बांटना। | कीड़ों व पीब से भरे कुंड में डालकर यातना देना। |
| 11 | सन्दंश (Sandamsa) — स्वर्ण, बहुमूल्य वस्तुएं या देवस्थान की संपत्ति चुराना। | लाल-गर्म लोहे के चिमटों से शरीर के मांस को नोचना। |
| 12 | तप्तसूर्मी / शल्मली — मर्यादा भंग कर पराई स्त्री/पुरुष के साथ व्यभिचार करना। | आग से तपते लोहे के पुतलों व कांटेदार वृक्षों से आलिंगन। |
| 13 | वैतरणी (Vaitarani) — पद व शक्ति का दुरुपयोग कर प्रजा व निर्बलों पर अत्याचार करना। | रक्त, पीब, बाल व हड्डियों से भरी खौलती नदी में फेंकना। |
| 14 | अवीचि (Avichi) — झूठ बोलना, असत्य साक्ष्य देना और मर्यादा तोड़ना। | ऊंचे शिलाखंडों से नीचे नुकीले पत्थरों पर पटकना। |
| 15 | सारमेयादन (Sarameyada) — लूटपाट, आगजनी, विष देना व समाज को हानि पहुंचाना। | यमलोक के हिंसक व भयानक शिकारी श्वानों के आगे डालना। |
| 16 | महाप्रभ (Mahaprabha) — पति-पत्नी के पवित्र संबंध में फूट डालना व घर तुड़वाना। | नुकीले शूल (भाले) से शरीर को भेदना। |
| 17 | मंजूस (Manjusa) — निर्दोष व्यक्ति को जबरन बंदी बनाकर प्रताड़ित करना। | जलती हुई लाल लोहे की सलाखों के बीच रखकर जलाना। |
| 18 | सूचीमुख (Suchimukha) — अत्यधिक धन-लिप्सा, धन छुपाना और जरूरतमंदों का हक मारना। | पूरे शरीर में लगातार तीखी सुइयां चुभोना। |
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